
राखी का ये पर्व है, प्रेम भरा त्योहार।
भाई-बहन के स्नेह से, महके सारा संसार॥
जिनके भाई हैं नहीं, बहनें हों न उदास।
दिल से अपना मानकर, दूँगा भाई का प्यार॥
दुनिया की हर बेटियाँ, बहना मेरी जान।
स्नेह-सम्मान से जोड़कर, रखूँ उनका मान॥
भाई का रिश्ता खून का, केवल होता नाय।
जहाँ मिले सच्चा स्नेह, रिश्ता वहीं बन जाय॥
भाई बिना बहनों को, कभी न हो मलाल।
मैं हूँ सबका अपना भाई, रखूँ सदा ख्याल॥
राखी केवल धागा नहीं, प्रेम-स्नेह की डोर।
दिल से जो बँध जाए कभी, टूटे न वह छोर॥
बहना तुम मुस्कान हो, भाई तुम्हारी आस।
रक्षा का ये पावन वचन, रहे सदा विश्वास॥
रूपेश कुमार
चैनपुर, सीवान, बिहार












