
एक दिलकश कश से ,
दिल लगाना कैसा!
तड़पते हुए दिल को,
समझान कैसा
आग है तो आग ही सही
मुंह न लगाना कैसा
तुम चाहो तो दिखाऊँ,
अपने जज्बात
तुम्हारे पास जरूर होगी ,
सुलगती हुई आग ।।
थोड़ा हमे भी कश की आदत होने दो
उसके बाद होगी ,हर हालात पर बात ।।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर













