
हिन्दी भाषा के सम्मान में महिला काव्य-मंच, धनबाद की काव्य-गोष्ठी संपन्न:
धनबाद। हिन्दी भाषा के सम्मान, संवर्धन एवं साहित्यिक चेतना को समर्पित महिला काव्य-मंच, धनबाद की ओर से दिनांक 21 अगस्त 2026, शुक्रवार को शाम 7:30 बजे एक विशेष ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय “हिन्दी भाषा के सम्मान में विशेष गोष्ठी” रहा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिला रचनाकारों ने हिन्दी भाषा के प्रति अपने भावों और विचारों को काव्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष आ० मोना बग्गा जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में आ० सस्मिता मंगराज (कंधमाल ईकाई), कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में डाॅ०गीता विश्वकर्मा जी उपस्थित रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसकी प्रस्तुति प्रमिला श्री तिवारी ने की। इसके पश्चात रचनाकारों ने हिन्दी भाषा की महिमा, पहचान, गौरव और मातृभाषा के प्रति अपने भावों को विभिन्न रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रमिला श्री तिवारी ने “हिन्दी भाषा सरस मनोहर ” को गाया, ज्योति बरनवाल ने “हिन्दी की वो पुरानी महक” के माध्यम से हिन्दी से जुड़े आत्मीय भावों को अभिव्यक्ति दी।सोनी शर्मा ने “है पावन पुनीता हिन्दी” प्रस्तुत किया। रिंकु दुबे वैष्णवी ने “लेखनी में बहें धार” के माध्यम से अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति दी। माधवी जी ने “हिन्दुस्तान अंश हिन्दी” के माध्यम से हिन्दी के गौरव को स्वर दिया, वही स्नेहा प्रभा पाण्डे ने “हिन्दी है अभिमान हमारा” के माध्यम से हिन्दी के प्रति गौरव व्यक्त किया, अनिता गोस्वामी ने “हिन्दी की गरिमा” को एक नई आवाज़ दी।
सोनी बरनवाल ‘कशिश’ ने “अपनी हिन्दी की बिंदी भी” के माध्यम से हिन्दी की आत्मीयता को रेखांकित किया। डॉ. नीरू प्रसाद ने “हिन्दी हमारी मातृभाषा” विषय पर अपनी रचना प्रस्तुत की। वहीं ममता सिंह ने “भाषा का करो सम्मान” के माध्यम से हिन्दी के प्रति सम्मान का संदेश दिया।
विशिष्ट अतिथि आ० सस्मिता मंगराज ने अपनी सुंदर प्रस्तुति से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की तथा भगवान जगन्नाथ जी को समर्पित गीत की पंक्तियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मुख्य अतिथि आ० मोना बग्गा जी ने अपनी भावपूर्ण पंक्तियों—“सुंदर है, सरल है, मीठी है, मनोरम है हिन्दी हमारी, राष्ट्रभाषा हिंद की जान है”—के माध्यम से हिन्दी भाषा के मर्म, माधुर्य और महत्त्व को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया, वही अध्यक्ष पूर्णिमा सुमन जी ने “हिन्दी से पहचान हमारी” के माध्यम से हिन्दी की गरिमा को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. गीता विश्वकर्मा ‘नेह’ ने सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुएह, अपनी रचना“हिन्दी या फिर अन्य ही भाषा पर तकरार” के माध्यम से हिन्दी के महत्व को स्वर दिया। उन्होंने हिन्दी को हमारी संवेदना, संस्कृति और अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए इसके सम्मान और संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन महिला काव्य-मंच, धनबाद की अध्यक्ष आ० पूर्णिमा सुमन ने किया, और समापन अवसर पर आ० पूर्णिमा सुमन ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं सहभागी रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से हिन्दी के प्रति प्रेम और सम्मान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास निरंतर जारी रहना चाहिए।
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार













