
क्या है शिक्षक की भूमिका,
कौन विद्यार्थी को सँवारता है?
कौन नन्हे-से अंकुर को
ज्ञान-वृक्ष बनाता है?
विद्यार्थी तो एक बीज है,
जिसमें अनंत संभावनाएँ हैं,
शिक्षक वह कुशल माली है,
जो पहचानता उसकी दिशाएँ हैं।
कभी अनुशासन की धूप दिखाकर,
कभी स्नेह की छाँव देता है,
अज्ञान के अँधियारे में
ज्ञान का दीप जला देता है।
जहाँ विद्यार्थी ठहर जाता है,
शिक्षक राह दिखाता है,
गिरकर फिर से उठना सिखाकर
उसमें विश्वास जगाता है।
शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता,
जीवन का अर्थ समझाता है,
अक्षरों से आगे बढ़कर
चरित्र का निर्माण कराता है।
जैसे माली पौधे को सींचे,
वैसे शिक्षक सपने सींचता है,
नन्हे मन के भीतर छिपे
भविष्य को वह पहचानता है।
आज जो विद्यार्थी छोटा है,
कल वही छायादार बनेगा,
जिस समाज को ज्ञान देगा,
उसमें शिक्षक का संस्कार रहेगा।
विद्यार्थी की हर उपलब्धि में
शिक्षक की मेहनत होती है,
एक दीप से हजारों दीप जलें—
यही शिक्षा की सच्ची ज्योति है।
शिक्षक बीज नहीं बनाता,
वह बीज को पहचानता है;
उसे उड़ान देता है, दिशा देता है,
और स्वयं से आगे बढ़ाता है।
शिक्षक माली है, विद्यार्थी पौधा,
शिक्षा उसकी जीवन-धारा है;
आज का नन्हा विद्यार्थी ही
कल देश का उजियारा है।….
पूनम कुमारी शिक्षिका
स्नात्तकोत्तर हिन्दी
मधुबनी बिहार












