
नेपाल में आया इस जल प्रलय ये कैसा कहर ढाया है।
ना जाने कितने ही अपनों को खून के आंसू रुलाया है।।
हंसता खेलता इंसान पल भर इतिहास बन जाता है।
इस भयानक मंजर ने जीवन में हमें यही सिखलाया है।।
सारे सपने टूट जाते हैं कितने अपने पीछे छूट जाते हैं।
किस दुनियां में खो जाते हैं जहां से कोई भी लौट ना पाया है।।
कितनों की दुनियां उजड़ गई,अपने भी कहीं खो जाते हैं।
इस उजड़े – बिखरे मंजर से हर एक दिल घबराया है।।
उस बिटिया के दिल के दर्द को भला कोई कैसे समझेगा।
जिसने इस तबाही में अपना सब कुछ ही गंवाया है।।
हर तरफ उजड़ा शहर है,ये कैसी दुखद घड़ी आई है।
अपनी मां भी खोई और पिता का साथ भी यहीं तक पाया है।।
कुदरत के आगे आज हर इंसान कितना बे असर है।
जो कल तक था अपना आंगन, वहां आज विरान डगर है।।
जो बिछड़े हैं उन्हें सुकून मिले, बस यही दिल की नज़र है।
उन मासूम सी आंखों में आज भी अपनों की खबर है।।
हे प्रभु,अब थाम ले तू इस तबाही का सिलसिला।
हर आँसू को मुस्कान मिले,हर ज़ख़्म को मिले हौसला।।
सोनी बरनवाल “कशिश”
जमुई, बिहार









