
हे मानव! कुछ दूर अकेले चलकर तो देख लो
अकेलापन भी जिंदगी में एक गजब की शक्ति है
तुम इसे पहचान लो, तुम इसे अच्छी तरह जान लो
ये जरूरी नहीं कि जो
आज तुम्हारे साथ है वो कल भी तुम्हारे साथ रहेंगे
शाश्वत सत्य है कि जो भी आया है उसे एक दिन है जाना
तो फिर अकेले चलने से क्यों है घबराना
हमेशा अकेले चलने का हौसला रखो
साहस और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ो
लोगों के बीच खड़ा होना है आसान
अकेलेपन से बहुत कुछ सीखने को है मिलता
राहें वही, दिशा वही तुम चाहे जिधर भी जाओ
ना हो कोई रोकने वाला, ना हो कोई टोकने वाला
अकेले चलना ही तुम्हारी स्वयं की शक्ति है
इस शक्ति को स्वयं पहचानो
जिंदगी को कुछ इस तरह से जियो
दूर तलक अपने लक्ष्य की ओर
अग्रसर होते जाओ
निश्चित रूप से मंजिल मिल जाएगी
ये तन तुम्हारा अपना, मन अपना,
जीवन जीने का अंदाज अपना
हे मानव! कर ले पूर्ण अपने जीवन का सपना
तू जब चाहे जहां चाहे सब कुछ हासिल कर सकता है
अकेलेपन में है अद्भुत शक्ति
इस शक्ति को पहचानो तभी तुम अपने सपने को साकार कर सकते हो
द्वेष क्लेश को दूर करके देख
कुछ देर अकेला चलकर देख
मन में दिए जलाकर तो देख
जीवन में अंधेरा जरूर छंट जाएगा
भीड़ से हटकर तो देख
अपने अंदर विश्वास को जगा कर देख
अकेले चलकर खुद अपनी पहचान बना कर देख
सफलता तेरी कदमों को चूमेगी
डॉ मीना कुमारी परिहार











