
दर्द मुस्कान भी है,
और कभी आंसू भी ,
नफरत भी यहीं पर है,
कभी ये दुआ भी हैं ।
किसी को खोने का गम ,
जो कभी नहीं होता कम ,
पर मुस्कान कुछ पल के लिए,
उसको देती है मरहम ।
यह फूल भी है ,तो कांटे भी,
यह गुलदस्ता है ,तो पतझड़ भी,
कभी देता जीने की वजह
कभी आंखों में ठहरा समंदर है।
एक मां की आंख आंसू भी है,
तो पिता का कठोर हृदय भी है,
मां ममता की छाँव बनी ,
पिता धूप में चलता प्रहरी भी है ।
खोकर पाने का सिलसिला यह है,
दर्द में मुस्कान का हौंसला यही है,
जो छूट गया वह समझता है ,
खुद को समझना का रास्ता यही है ।
दर्द से शिकायत नहीं,
यह भी मेरा हिस्सा है,
जिसने मुझे भीतर से गढ़ा ,
वही मेरे सबसे गहरा हिस्सा है ।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र













