
वो पारिवारिक उत्सव जो घर मे है होते
सच मानो तो,बडे ही मजेदार है होते
घर के सारे सदस्य ही मिलकर तैयारी है,करते
आपसी सहयोग की ये भावना ,मन को है खूब भाते ।
छोटे छोटे उत्सव घर मे ,होते ही है रहते
उन उत्सवो मे जन,धन की जरूरत नही है ,समझते
कम लागत मे?घर के लोगो से ही, पूरी है करते
ना शोर शराबे,ना भीड़,,बस अपने ही सब है होते ।
जन्मदिन,तीज,करमा,रक्षाबंधन,और मकर संक्रांति
सफलता हासिल,मिली जीत, और है वजह भांति भांति,
ये सब पारिवारिक उत्सव पलभर मे मिलते है सहमति
अपने अपने स्तर से ,सब तैयारी भी है कर देती ।
ये उत्सव,मन को आनंद है खूब पहुंचाते
दिनभर की भागम-भाग से सूकून है,खूब मिलते
फिर से ,एक नयी शुरूआत काम की है होते
वो पारिवारिक उत्सव,सबको मन है खूब भाते ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













