
डर भुलाता ही गया।
पास आता ही गया।
इश्क़ में दरियादिली,
मैं दिखाता ही गया।
हौसला जितना मिला,
आज़माता ही गया ।
जब तलक़ टूटा भरम,
मैं निभाता ही गया।
बोल जो दिल से उठे,
गुनगुनाता ही गया।
मुझसे जो रूठे अगर,
मैं मनाता ही गया।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र













