
ठहरने का मन भी है,
घर पहुंचने की जल्दी भी है,
बता ऐ जिन्दगी मैं क्या करूं,
ऐ गमें जिंदगी कुछ तो दे मशवरा,
यहां से विदाई की कीमत अदा कैसे करूं,
यादों को साथ लेकर जाऊं और
खुशियां मनाऊं,
मैं साथ बिताए पलों से,
बिछड़ कर आह भरूं,
या सिसकियां भरूं,
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













