Uncategorized
Trending

आशीर्वाद का दीया

कविता

मिट्टी का दिया, पर संकल्प है भारी,
पच्चीस वर्षों की सेवा की उजियारी।
सुशासन की लौ में विश्वास जगा है,
गरीब के आंगन में प्रकाश लगा है।

तेल नहीं, ये निस्वार्थ कर्म की धारा,
बाती नहीं, ये जन-जन का सहारा।
जिसने जीवन सँवारा, अँधेरा मिटाया,
उसे लौटाने को ये आशीर्वाद का दिया जलाया।

एक लौ से लाखों चेहरे खिल उठे हैं,
टूटी उम्मीदों के ताले भी खुल उठे हैं।
राष्ट्र निर्माण का यही तो मंत्र प्यारा,
सबका साथ, सबका जीवन उजियारा।

झिलमिलाता दिया कहे, रुकना नहीं है,
सेवा पथ पर कभी झुकना नहीं है।
आओ, इस लौ को और प्रखर बनाएं,
अपने आशीर्वाद से भारत को चमकाएं।

रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा,तहसील पामगढ़,जिला जांजगीर-चांपा,छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *