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राधाष्टमी

राधा रानी…
प्रेम ,त्याग ,समर्पण
इंतजार
साथ होकर भी
साथ ना होने की
सजा…
ख़ुद को खोकर
बस उसका
हो जाना..
प्रतीक्षा ठूठ जैसी
चाहें धरा हरी..
पूजे सारा जहाँ
दामन खाली.
समुंदर के पास
होकर भी प्यासी..।
शायद प्रेम
ऐसा ही होता है
पा लिया जो फिर
प्रेम कैसा..?

सुनीता की कलम से
Sunita Nalwaya

शिक्षिका,लेखिका

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