
नन्हे-नन्हे पाँव हमारे,
सपने हैं आकाश किनारे।
आँखों में उजियारा लेकर,
चल पड़े हम जग को जीतकर।
सूरज हमको रोज़ सिखाता,
उठो, नया हर दिन मुस्काता।
चंदा कहता—डरो न प्यारे,
तुम भी चमको बनकर तारे।
तितली के संग रंग सजाएँ,
फूलों से मुस्कान चुराएँ।
चिड़िया बनकर पंख पसारें,
नीले नभ में उड़ें हमारे।
पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ,
धरती माँ को खूब सजाएँ।
नदी कहे—मत रुकना प्यारे,
बढ़ते जाना बनकर धारे।
गलती होगी—फिर सीखेंगे,
गिर जाएँ तो फिर उठेंगे।
मेहनत को अपना मित्र बनाएंगे,
हर मुश्किल से पार हम जाएंगे।
मिल-जुलकर हम गीत सुनाएँ,
हँसते-हँसते जग महकाएँ।
हम नन्हे हैं, मन के सच्चे,
भारत के हम प्यारे बच्चे।
ज्ञान हमारा दीप बनेगा,
सपनों का आकाश सजेगा।
आज भले ही हम है छोटे-छोटे पर हमारी सोच है मोठी,
कल होंगे हम सब भी इस जहां के मोती!
धर्मेंद्र कुमार राठौर व्याख्याता भौतिक विज्ञान
झालावाड़ राजस्थान












