केरल में उत्तर भारत-दक्षिण भारत संस्कृति मिलन एवं सम्मान समारोह का सफल समापन, 18 राज्यों की 72 विभूतियाँ सम्मानित

मलमपुझा (केरल)। केरल के पलक्कड़ जिले स्थित हार्टफुलनेस स्पिरिचुअल रिट्रीट सेंटर, मलमपुझा में आयोजित चार दिवसीय मलयगिरि आध्यात्मिक चेतना शिविर सह उत्तर भारत-दक्षिण भारत संस्कृति मिलन एवं सम्मान समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। साहित्यकार डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 18 राज्यों से आए 72 विशिष्ट प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए ‘भारतीय भाषा-संस्कृति रत्न सम्मान’ से विभूषित किया गया।
इस समारोह का आयोजन दिव्य प्रेरक कहानियाँ मानवता अनुसंधान केंद्र की इकाई भारतीय भाषा समन्वय एवं सहयोग परिषद् द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद, भाषायी समन्वय, आपसी सहयोग तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अभिषेक कुमार ने कहा कि समारोह के दौरान उत्तर भारत और दक्षिण भारत की सभ्यता एवं संस्कृतियों का मिलन अद्भुत, अनूठा और ऐतिहासिक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि भाषायी विविधता के बावजूद प्रतिभागियों के बीच एकता, समानता, आत्मीयता और सांस्कृतिक सामंजस्य का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला। चार दिवसीय इस आयोजन ने सभी प्रतिभागियों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ी और उन्हें आपसी संवाद तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान का यादगार अवसर प्रदान किया।
समारोह में शामिल प्रतिभागियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय एकता, भारतीय भाषाओं के समन्वय और विविध सांस्कृतिक परंपराओं को निकट लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। प्रतिभागियों के अनुसार, ऐसे आयोजन देश की विविध भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने, परस्पर सम्मान की भावना विकसित करने तथा सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर राजीव भारद्वाज, अजीत जैन, अशोक नायर, श्वेता ब्रजेश, देवीदास, डॉ. प्रकाश चंद टेलर, विनय श्रीवास्तव सहित अन्य प्रतिभागियों ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। समारोह ने भारतीय सांस्कृतिक विविधता में निहित एकता के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को अविस्मरणीय अनुभव प्रदान किया।













