
जी रया, जागि रया, बचि रया,
इन दिन मासौं कें तम भेटने रया।
दुब कि जै परि तुम फैल जया,
त्यार-ब्यार में घर औंने रया।
तुमरि एक एकास, पांचो पचास हो,
धाना भकार रोज भरिया का हों।
तुमर नान तिन जी रोंन बचि रोंन,
मन कि सब ईच्छा पुरि हुने रोंन।
पाण-माई बचि रोंन, गोठ गाई बचि रोंन,
तुमर कुडी पुरुख रोज निरोगी रोंन,
तुमर परिवार, ईष्ट मित्र सबे बचि रोंन,
य त्यार-ब्यार तुमार जीवन में औनें रोंन।
आपनी ईजा-बौज्यू कें जन भुलि जया,
आपन ईष्ट कें ले रोज याद करने रया।
आपन तिबर्शी जागर कें ले दिने रया,
घर आबेर आपनी कुड़ी कें देखने रया।
जी रया, जागि रया, बचि रया,
इन दिन मासौं कें तम भेटने रया।
जीवन भरि खुश और नीरोगी रया,
हर त्यार-ब्यार में घर औंने रया।
कतु भल लागनि य आपन गाड़ गध्यार,
य हमरि जनम भूमि लागेंछ भौते प्यार।
जब रोज चौघाना खाव में भैट छ्यां यार,
न भूलि सकना हम, उन दिनों जस प्यार।
य होई त्यार में सब बुरि बात भुलि जया,
इसी कै हर त्यार-ब्यार में मिलने रया,
मेरि तरफ बटि सबौं कें पैलाग-प्यार,
तुमोंकें भौते बधाई और मंगल हो य त्यार।
योगेश गहतोड़ी “यश”













