
रजनी प्रभा
यात्रा_वृतांत में स्थान विशेष और प्रामाणिक तथ्यों के साथ-साथ आत्मीयता,वैयक्तिकता, कल्पनाशीलता और रोचकता का समावेश होता है। इसमें किसी स्थान के प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक संरचना, रीति _रिवाज और संस्कृति और लोगों का यथार्थ चित्रण होता है। यात्रा_वृतांत एक ऐसी जीवंत कहानी होती है जिसमें लेखक अपने यात्रा के अनुभवों का दृश्यात्मक वर्णन करना है जिसका उद्देश्य पाठक को यात्रा के लिए प्रेरित करना, यात्रा विशेष की सटीक जानकारी देना और उसे स्थान की विशेषताओं को बताना भी होता है। जिसकी शुरुआत लेखक के निजी अनुभव से भले ही हो, परंतु रसस्वादन के बाद पाठक का इससे सहजता से साधारणीकरण स्थापित होता चला जाता है, जिसमें कथा कहन कौशल की भूमिका सर्वोपरि होती है। यानी यथार्थ को रोचकता और कौतूहलता की चाशनी में डुबोकर परोसना पड़ता है।यह तो सर्वविदित है की यात्रा_ साहित्य की शुरुआत समानयतः साहित्य की अन्य विधाओं की तरह आधुनिक युग में भारतेंदु हरिश्चंद्र के द्वारा ही हुआ था।उनके यात्रा_वृतांत का प्रकाशन ’कविवचनसुधा’ में हुआ करता था। इनके ’सरयू पार की यात्रा’ को हिंदी का प्रथम यात्रा_वृतांत होने का गौरव प्राप्त है। कथेतर साहित्य में यात्रा साहित्य संभवतः ऐसी अकेली विधा है जिस पर हर भाषा के लेखकों ने कुछ न कुछ अवश्य लिखा है। भारतेंदु, बालकृष्ण भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र, रामवृक्ष बेनीपुरी, जवाहरलाल नेहरू,राहुल सांकृत्यायन, प्रभाकर माचवे जैसे तमाम सिद्धस्थ रचनाकारों की लेखनी से एक से बढ़कर एक यात्रा वृतांत रचे गए।
इसी कड़ी में एक नाम गुजरात के प्रसिद्ध साहित्यकार और अनुवादक डॉक्टर गुलाबचंद पटेल का शामिल किया जाता है। इन्होंने अपने बंगलुरु, उज्जैन, हरिद्वार, छत्तीसगढ़ ,नाथद्वारा,पुणे, मुंबई सार्व,प्रयागराज, नागपुर, शिलांग, हैदराबाद ,भोपाल, चित्तौड़गढ़, केरल और दार्जिलिंग आदि स्थानों के साहित्यिक भ्रमण को, कटु_मृदु अनुभवों को, बड़े व्यापक और सटीक ढंग से प्रस्तुत किया है। जिसमें जहां एक और अहिंदी भाषी क्षेत्रों में भाषा संबंधी होने वाली परेशानियों का जिक्र है तो दूसरी ओर वसुधैव कुटुंबकम के भाव से अभिभूत होने के भावुक प्रसंग।श्री श्री रवि आश्रम बेंगलुरु पहुंचकर आप वहां ठहरे सभी लोगों को कैंसर ओर नशा के प्रति जागरुक करते हैं।आश्रम की व्यवस्था और बेंगलुरु के रहन_सहन का सुंदर चित्र खींचा है आपने।डॉक्टर गुलाबचंद पटेल जो एक कुशल कवि, लेखक,समाजसेवी और अनुवादक तो है ही साथ ही नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता और ’रेस इन रेन’ ट्रस्ट के माध्यम से कैंसर जैसी भयावह बीमारी के प्रति लोगों में जन _जागरूकता भी फैला रहे हैं। मूलतः गुजरात से होते हुए भी अपने हिंदी की सेवा में महती भूमिका निभाई है। इन्होंने साहित्य की लगभग समस्त विधाओं में पर्याप्त लेखनी चलाई है परंतु इस यात्रा_वृतांत में आप समय से सीधा संवाद करते प्रतीत होते हैं।श्री श्री रवि शंकर आश्रम बेंगलुरु यात्रा वृतांत और आलेख’ में वहां की अनुपम छवि का आप आंखों देखा हाल बयां करते हैं_”आर्ट ऑफ़ लिविंग का मुख्य स्थान बेंगलुरु आश्रम में स्थित है। मेडिटेशन के लिए बहुत सुंदर ’लोटस टेंपल’ है।यहां एक छोटी फ्लोरा, ग्रीनरी स्पार्कलिंग, फाउंटेन, लेक, लिली पॉन्ड्स, वॉटरफॉल और अर्थ पाथ मेडिटेशन के लिए बहुत अच्छा है। हर सप्ताह में रेजिडेंशियल मेडिएशन कोर्स का आयोजन होता है, जिससे शरीर स्वस्थ और मन प्रफुल्लित होता है। पंचकर्म सेंटर में आयुर्वेदिक थेरेपी दी जाती है आई केयर थेरेपी भी दी जाती है। मसाज किया जाता है। नाड़ी _परीक्षण किया जाता है।स्किन और हेयर केयर की ट्रीटमेंट दी जाती है। थायराइड और डिप्रेशन के लिए 7 दिन का वूमेंस केयर प्रोग्राम चलता है।” ऐसी बहुत सी जानकारियां इस संग्रह में आपको मिलेंगी।डॉक्टर गुलाबचंद पटेल अपने भावों को अनुभवों को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से सरल सुबोध शब्दों के माध्यम से व्यक्त करते हैं।इस पुस्तक में भिन्न-भिन्न स्थलों के रहन-सहन, वेश_ भाषा, लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यवस्थित ढंग के से प्रस्तुत किया गया है, जिसे पढ़ते समय पाठक निश्चित तौर पर स्वयं को इस स्थान पर खड़ा पायेगा। एसा मेरा पूर्ण विश्वास है। और फिर पाठकों के हृदय में भी उस स्थान _विशेष को देखने_ समझने और उस पर अपनी राय देने की अदम्य लालसा उत्पन्न होगी। डॉ गुलाबचन्द पटेल स्वस्थ रहें, यात्राएं करते रहें और उत्तरोत्तर ऐसी ही युगांतरकारी कृतियां रचते रहें और हिंदी_ साहित्य के वृहत _कोश को और भी समृद्ध करते रहें। इस ’यात्रा का अवसर’ यात्रा_वृतांत संग्रह के लिए उन्हें ढेरों शुभकामनाएं।
नाम
रजनी प्रभा
सी/ओ_कुंदन कुमार,जारंगडीह,गायघाट,मुजफ्फरपुर, बिहार (843118)













