
माटी का खिलौना
माटी में मिल जाएगा।2
क्यों करता है गुरूर,
रे पगले,,,
तू यूं ही मर जाएगा ।।2
तूने बनाए गाड़ी बंगले
सैर सपाटे,,,
सब धरे यही रह जाएंगे2
क्यों करता है तेरी मेरी।
साथ में कुछ ना जाएगा2
माटी का खिलौना
माटी में मिल जाएगा।2
क्यों करता है गुरूर,
रे पगले,,
तू यूं ही मर जाएगा। ।2
कभी तो समझ ले,
सच को प्यारे,,,
वो सच तो सामने आएगा
जो भी बना का माटी खिलौना,
वो तो एक दिन टूटेगा।2
क्यों करता है गुरूर,
रे पगले,,
तू यूं ही मर जाएगा।।2
माटी का खिलौना,
माटी में मिल जाएगा ।।2
जो कुछ सच है तेरे सामने
यह फरेब एक धोखा है।2
जो भी बना माटी का खिलौना,,
उसे माटी में फिर मिलना है2
क्यों करता है गुरूर,
रे पगले,,,
तू यूं ही मर जाएगा। ।2
माटी का खिलौना,
माटी में मिल जाएगा ।।2
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश









