
वन विनाश को रोकना है,
वृक्षारोपण करना है,
वृक्ष से ही तो मिलते है,
फल कंद मूल आदि,
वृक्षों का तो है पहचान,
फल फूल है इसका निशान,
स्वच्छ वातावरण बनाना है,
वृक्षारोपण करना है।
इस उपवन को सजग बनाएं,
स्वच्छ वातावरण अभियान
चलाएं,
वृक्षों को हम बचाएं,
मानव को जागरूक बनाएं,
इस उपवन को सदाबहार
बनाना है,
वृक्षारोपण करना है।
इन वृक्षों से हरियाली छा
जाती है,
कोयल की कुहू कुहू कानों में
गूंजने लगती है,
वृक्षों की देख रेख हम रोज
करते है,
वृक्षारोपण करना हमारा कर्त्तव्य
समझते है,
जन जीवन को बचाना है,
वृक्षारोपण करना है।
इन भीनी भीनी हवाओ से,
वृक्ष मचलने लगता है,
फूलों की खुशबू से सारा जहां
महकने लगता है,
वृक्षों को सुहाना बनाना है,
वृक्षारोपण करना है।
इन वृक्षों की परछाईं से,
मन में शांति छा जाती है,
तब मन के एक विश्वास से,
जीवन उज्ज्वल हो जाती है,
स्वच्छ मौसम बनाना है,
वृक्षारोपण करना है।
वृक्ष करते हैं हमारी सहायता,
पर्यावरण संतुलन का होता है
इससे नाता,
वृक्षों की सुंदरता बढ़ाना है,
वृक्षारोपण करना है।
इन वृक्षों की ताजी हवा,
हर मन को छू जाती है,
इन वृक्षों की सुंदरता,
करती है हर जमी में अपना
बसेरा,
हर धरा मे वृक्षो का समूह
बनाना है ।
वृक्षारोपन करना है।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ












