
सुंदर होगी वसुधा हमारी
नारा हम सब लगा रहे हैं
पेड़ों को नित काट- काटकर
जंगल जब से जला रहे हैं
जडी बूटियां खत्म हो रहीं है
केमीकल गोलियां खा रहे हैं
पर्यावरण मे प्रदूषण फैलाया
कृतिम आक्सीजन लगा रहे हैं
नाक मुंह पर मास्क लगा कर
अपना जीवन ही बचा रहे हैं
औरौ का चाहे जान बचे ना
स्वार्थी जीवन विता रहे हैं
होगा असर मन बदलो प्यारे
कर दो आवाह्न मिल अब सारे
चारों तरफ हरियाली होगी
शुध्द, समीर खुशहाली होगी
सुंदर सपना होगा सबका
सुखद स्वस्थ भारत हो अपना
कदम उठाओ पहले अपना
पेड़ लगाकर धरती पर रखना
देख के तुमसे प्रेरणा लेगे
धरती मां का गहना बनेंगे
नाम अमर होगा उन सबका
जिनके हाथों से पेड़ लगेगें
डॉ.कृष्ण कान्त भट्ट
सेन्ट विन्सेंट पल्लोटि कॉलेज बेंगलूरु कर्नाटक
स्व रचित मौलिक एवं अप्रकाशित रचना












