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मानव से अब दानव बन गया है आदमी
मानव से अब दानव बन गया है आदमी।
अहंकारवश कितना तन गया है आदमी।
भूल चुका रिश्ते -नाते संबंध प्रेम के,
अपनों के शोणित से सन गया है आदमी।।
परिवार से ही रार कर रहा है आदमी।
हर रिश्ता तार-तार कर रहा है आदमी।
बुरी संगतों में फँस रोज पी रहा शराब,
निज जीवन रोज खार कर रहा है आदमी।।
पत्नी के संग मार कर रहा है आदमी।
गैरों से सिर्फ प्यार कर रहा है आदमी।
गलती करके भी गलती से सीखता नहीं,
नित गलती बार-बार कर रहा है आदमी।।
खुद से खुद का सुकून हर रहा है आदमी।
अधर्म का घड़ा रोज भर रहा है आदमी।
चोरी चकारी रोज का अब काम हो गया,
आए दिन बुरा काम कर रहा है आदमी।।
पूजा पाठ नेम व्रत तज रहा है आदमी।
राम नाम नहीं रोज भज रहा है आदमी।
धन दौलत के लिए रात दिन रोज खट रहा,
घंटे की तरह रोज बज रहा है आदमी।।
राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)












