
अब बातेँ नहिं होती है ,
पहले खूब, बातेँ होती थी ,
फिर अचानक, बातेँ बंद हो गई, ,
ना जाने क्यों, समझ न पाए ।
खैर कोई बात नहीं, ,
नहिं होती है, बातेँ तो ,
नहिं होने दे, क्या होगा?
थोड़ी तकलीफ होगी मन में ।
और क्या,कर सकते है?
अब झुकना भी तो,अच्छा नही लगता है,
झूके भी है,कई बार उसके पास की
आखिर हुआ क्या है,गलती मुझसे?
लेकिन कोई सटीक, उत्तर नही मिला
बस,बाते नही होती है,तो नही,
कुछ दिनो तक,खराब लगा खूब
लेकिन अब तो,आदत हो गई ।
आमने सामने हो जाने पर भी,तो
खामोशी से,कुछ लोकाचार बाते
फिर वो अपने,और मै अपने,
पता ही नही चलते कि,कोई है भी ।
लेकिन एक बात चुन्नू कवि का कहना है,
ऐसी परिस्थिति होना,ठीक नही ,
ये नश्वर तन का,कोई भरोसा नही
अतः,आपस मे बाते होनी चाहिए ।
आपसी मनमुटाव ठीक नही,
जरूरत अपनों की ही होती है
ना जाने कब,कहां, किसके साथ
जरूरत आ पडे एक दुसरे का ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड










