Uncategorized
Trending

गीत

पहला पहला ये प्यार हुआ था।
वो प्यार हमें उपहार मिला था।।
सब जन मोहित हुआ था हम पर।
गृह नक्षत्रों की बहुत कृपा थी हम पर।।
*
वो एक रूप का मोहक सागर थी।
सागर सम गहरी एक गागर थी।।
प्रिय ने मधु स्वाद रखा अधर पर।
ग्रह नक्षत्र की बहुत कृपा थी हम पर।।
*
फूलों की महक चंदन सा बदन।
स्पर्श पा यह महक उठा जीवन।।
कोयल वाणी भारी तनमन पर।
ग्रह नक्षत्र की बहुत कृपा थीं हम पर
*
फूल बिछे थे मेरी राहों में ।
इजहार हुए मस्त बहारों मे।।
एक नजर जब उसकी पढ़ी हम पर।
नक्ष्यतों की बहुत कृपा थी हम पर।।
*
जीभर के देखते रहें उनको।
वो भी एकटक देख रहें हमको।।
नजर ही नजर में छाए मन पर।
नक्षत्रों की बहुत कृपा थी हम पर
+
गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर

जावरा जिला रतलाम,म.प्र.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *