बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा मासिक ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन: श्रद्धांजलि सभा के उपरांत गूंजे राष्ट्रभक्ति, योग और मानवीय संवेदनाओं के स्वर

दिनांक: 22 जून 2026
आयोजक: बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट, बिहार इकाई (पंजीकरण संख्या: Rag.N.E 0013772(THN))
कार्यक्रम अध्यक्ष: आ० शिव कुमार सिंह (संस्थापक व कार्यक्रम अध्यक्ष)
गोष्ठी अध्यक्ष: आ० खुशबू बरनवाल ‘सीपी’ (अध्यक्ष)
बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट (बिहार इकाई) के तत्वावधान में मासिक ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का अत्यंत गरिमामयी और भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत शोकाकुल माहौल में हुई, जहाँ संस्था की राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय सत्यभामा सिंह जी की पूजनीय माता जी के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। पटल पर उपस्थित समस्त पदाधिकारियों एवं रचनाकारों ने दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मौन रखा तथा ईश्वर से प्रार्थना की कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
“एक आत्मा का परमात्मा से मिलन हो गया है।” इस शोकाकुल वातावरण के बीच, शोक को शक्ति में बदलते हुए और साहित्यिक परंपरा का निर्वहन करते हुए, रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से पटल के माहौल को सकारात्मकता और साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ आ० राम किशोर पाठक जी द्वारा प्रस्तुत अत्यंत सुमधुर माँ सरस्वती वंदना “शुभमति देकर भाव जगा कर” से हुआ। इसके पश्चात क्रमिक रूप से अलग -अलग शहरों के कोनों से जुड़े प्रख्यात कवियों एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया:
आ० ज्योति बरनवाल (सचिव सह मीडिया प्रभारी): अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अत्यंत सुंदर हास्य-व्यंग्य कविता “चलो चले हम योग की ओर” प्रस्तुत कर पटल को मुस्कुराने का अवसर दिया और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
आ० सोनी बरनवाल (साहित्य मंत्री): पितृ वंदना पर आधारित अत्यंत भावुक कविता “जीवन की पथरीली राहों में जो संभाले वो है पिता” पढ़कर सभी की आँखें सजल कर दीं।
आ० रंजना झा (भागलपुर): मानवीय संवेदना और संघर्ष को बयां करती सुंदर पंक्तियाँ “भार पीड़ा का है फ़िर भी” साझा कीं।
आ० खुशबू बरनवाल (सहसचिव ): बचपन और ऋतु परिवर्तन को समेटे हुए “लो आ गई है गर्मी की छुट्टी” कविता से सबके लिए उपहार की यादें ताज़ा कर दीं।
आ० संगीता बरनवाल (गया जी ): पुरुष वर्ग के अनछुए पहलुओं और उनके सामाजिक दायित्वों पर गंभीर विमर्श करती हुई कविता “आओ करते हैं पुरुष समाज में पुरुषों की बात” प्रस्तुत की।
आ० राम किशोर पाठक: विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग रहने का हौसला देती रचना “कभी रहकर अकेले भी नहीं, हार मैं स्वीकार” का पाठ किया।
आ० कामेश्वर कुमार ‘कामेश’ (संरक्षक महोदय): शृंगार रस और प्रेम के अनूठे भावों से सजी उत्कृष्ट ग़ज़ल “बहुत हुआ मान जाओ तड़पाओ ना सनम” से महफ़िल में समां बाँध दिया।
आ० अमृता सिन्हा सोनी (नवादा): मानव जीवन की महत्ता और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हुई दार्शनिक रचना “शुक्रिया ज़िंदगी मुझे मानव तन देने के लिए” प्रस्तुत की।
आ० नरेंद्र कुमार (संगठन मंत्री): देश की वर्तमान स्थिति और राष्ट्र चिंतन पर आधारित कविता “भारत का भविष्य किस दिशा में जा रहा” से सबको सोचने पर विवश किया।
आ० खुशबू बरनवाल “सीपी”(अध्यक्ष , राँची): आरोग्य जीवन का संदेश देते हुए पंक्तियाँ पढ़ीं— “कर लो सदा सब योग को, जीवन निरोगी बन जियो”।
गोष्ठी के सबसे अंतिम चरण में संस्था के संस्थापक सह कार्यक्रम अध्यक्ष आ० शिव कुमार सिंह जी ने पटल पर प्रस्तुत सभी कविताओं की अत्यंत सूक्ष्म एवं सकारात्मक समीक्षा की। उन्होंने सभी रचनाकारों के हुनर की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। अंत में उन्होंने स्वयं भी अपनी दो पंक्तियों की मर्मस्पर्शी रचना साझा की: “एक दिन पूछा मैंने परछाई से…”।
कार्यक्रम के सफल संचालन और समन्वय ख़ुश्बू बरनवाल “सीपी”जी ने किया। अंत में बिहार इकाई की अध्यक्ष सुंदर और सफल कार्यक्रम के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में, अध्यक्ष महोदय द्वारा पटल पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं श्रोताओं को आगामी गोष्ठी में पुनः मिलने का हार्दिक आश्वासन देते हुए सभा के समापन की घोषणा की गई।
रिपोर्ट-ज्योति बरनवाल , नवादा (मीडिया प्रभारी)










