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राम दर्शन की चाह


चरण- कमल की वंदना , राम -नाम विश्वास।

राम -सिया छवि उर बसे , रखिए शुभ की आस।।

मंगल बेला शुभ घड़ी , लेंगे चरण पखार।

मानवीय गुण दिव्य हैं , राम जगत आधार।।

घना तमस अब छॅंट गया , हुआ स्वप्न साकार।

स्वागत में दीपावली , राम जगत आधार।।

राम जगत आधार हैं , रघुकुल के सरताज।

दयासिंधु करिए कृपा , करो पार महराज।।

राम राम जपिए सदा , हृदय बसें श्री राम।

मिट जाएंगे विघ्न सब , मिले राम का धाम।।

पूजा करिए राम की , खुलें हृदय के द्वार।

राम -राम कहते रहो , होगा बेड़ा पार।।

जिस सागर को बिना सेतु,लांघ न सके श्री राम।

लांघ गए हनुमान उसी को,लेकर राम का नाम।।

जग सृष्टि,जग कर्ता-भर्ता,राम जगत आधार।

जग चेतन सब कीट पतंगे, तुमसे पाते प्यार।।

घर -घर में उल्लास है , सभी देखते राह।
राम लला आ जाइए , है दर्शन की चाह।।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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