
गौंड की महारानी थी
एक बहादुर क्षत्राणी थी
नाम था उनका दुर्गावती महिला वो स्वाभिमानी थी
गौंड की महारानी थी
चंदेलों की सुकुमारी थी
शाष्त्रों मे निपुण दुश्मन पर भारी थी राष्ट्र सम्मान पर मर मिटने वाली वो एक नारी थी
गौंड शासन की अधिकारी थी मुगलों के लिये तीखी एक अन्गारी थी
राष्ट्र रक्षा की एक अमिट निशानी थी
वो गौंड की महारानी थी
अधीनता स्वीकार ना था
हारना गवार ना था
समझौता अंगीकार ना था
राष्ट्र धर्म परिवार धर्म से बढ़कर कोई ओर हार ना था
रानियों मे रानी दुर्गावती थी दुर्गा रूप बलिदानी थी
वो गौंड की महारानी थी
इन्क़ावन्ं युद्ध लड़े थे
चालीस वसंत ही नपे थे
अकबर को बार बार युद्ध मे घसीटा था
हर बार ही उसको पीटा था
बेशर्म अकबार फिर भी ना माना था गौंड गढ़ा को हथियाना था
रानी से उसे अपनी हार का हिसाब मिलाना था
जीत ना पाया अकबर वो गौंड मंडला की रानी थी ऐसी हमारी रानी राष्ट्र भक्त संस्कृति रक्षक दीवानी थी
वो गौंड की रानी थी।
स्वरचित एवं मौलिक
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र










