
लाखों विद्यालय बन्द हो रहे,
पर निजी संस्थान खुल रहे है।
शिक्षा का व्यापार बढ रहा हैं,
निजीकरण को बढावा मिल रहा।।
लाइब्रेरी और कोचिंग दिख रही,
ना शिक्षा कहीं नज़र आ रही हैं।
उनको रोजगार ना मिल रहा कहीं,
बेरोजगारी को नित बढा रही हैं।।
रोजगारपरक ना शिक्षा नीति,
ना अरमानों को यूं पुरा करती।
बच्चों को ना राह दिखलाती,
मानसिक रोगी उन्हें बनाती।।
नई शिक्षा नीति शोध को बढावा दे,
हमारी बेरोजगारी को दूर करे।
हस्तशिल्प की वो सहायक बने,
राष्ट्रीय उन्नति का मार्ग प्रशस्त करे।।
आज सुधार की बहुत जरूरत है,
टेक्नोलाॅजी समय की मांग हैं।
हमें विश्व का नेतृत्व करने हेतु,
शिक्षा उत्थान पर देना ध्यान हैं।।
मुन्ना राम मेघवाल भाटी।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान ।










