
किताबों की ख़ामोशी में इक कहानी बसती है,
हर एक स्याही में नई जवानी बसती है।
इल्म वो समंदर है जो कभी कम नहीं होता,
जहालत के सन्नाटे में कोई दम नहीं होता।
उस्ताद की नज़रों में सितारे से चमकते हैं,
लफ़्ज़ों के सफ़र में नए जहाँ महकते हैं।
चलो तालीम को इबादत बना लें हम,
अपने वतन को रोशन आफताब बना लें हम।
श्री ठाकुर देवघर झारखंड












