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झूठी बात छिपाए क्या ,

सच को ,आखिर बताएं क्या
झूठी बातों को , सुनाए क्या

भरपूर झूठ बोलने वाले मिले ,
सच की उम्मीद ,लगाए क्या ।।

नफरत फैलाने वालो को आखिर
हम प्रेम का पाठ ,पढ़ाए क्या।

काँटों से भरा , चमन हो यदि
तब पुष्प इनमें हम सजाएं क्या ।।

सुख–दुख दुनियाँ के दो साथी
झूठा भ्रम हम फैलाएं क्या

मानवता में आग लगी आजकल
मानवता हम दिखलाए क्या ।।

शातिर , चोर लुटेरे ,बन बैठे साधु
दिल की बात ,हम बताए क्या

मोन हुआ ,जब सत्य ज़ुबा पर
अब झूठी बात छिपाए क्या ।।।

©आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
भारत

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