
पाँच जुलाई का पावन दिन,
प्रकाश पर्व कहलाता है।
सिख धर्म के छठें गुरु का,
जन्म दिवस यह आता है।।
गुरु अर्जुन के वीर सपूत,
सत् धर्म कर्म अनुरागी थे।
गुरु हरगोबिंद साहिब जी,
सेवा सत्कर्म के राही थे।।
मीरी-पीरी’ का संदेश दिया,
शस्त्र शास्त्र से अनुरक्ति थी।
हाथ में शस्त्र, हृदय में प्रेम,
सेवा साहस प्रभु भक्ति थी।।
पीरी अर्थ आध्यात्मिकता,
मीरी से न्याय की रक्षा है।
अन्याय के विरुद्ध खड़े हो,
निर्बलों की करो सुरक्षा है।।
जाति-पात का भेद मिटाके,
सबको गले लगाया था।
सदा सेवा पथ पर चलना,
गुरु जी ने यही सिखाया था।।
गुरु हरगोविंद जी कहते थे,
सच्चे मन से हरि ध्यान करो।
तन मन धन सब अर्पित कर,
गुरु-मानवता का मन करो।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश













