
आधुनिक दौर है हमारी महिलाएं भी आधुनिकता की दौड़ में शामिल है
कभी गीतों के माध्यम से अपने मन की व्यथा सुनाती थी —— भेज बाबुल को सावन में लीजो बुलाया
अब ये सारे भाव सिर्फ गीतों में है
औरतों ने अपने आप दुनिया के सारे भंवरजाल में फंसा लिया है सिर्फ घर परिवार समाज ही नहीं
चांद और मंगल ग्रह पर जाना भी अपने हिस्से में लिख लिया है इसी आपाधापी में जिंदगी जीने के बजाय जिंदगी की दौड़ में शामिल हो गयी हैं
बच्चों को सफल बनाने से लेकर मोहल्ले की पंचायत तक सब अपने हिस्से में लिख लिया है ।
अब भुगतो या तो जिम्मेदारीयां बांट के फिर से मेंहदी चूड़ी और झूले की पेंग बढ़ाने में मस्त हो जाओ।
के वी












