
छुपाते प्यार हैं दिल में
छुपाते प्यार हैं दिल में, नहीं हमसे जताते हैं।
हृदय में प्रेम कितना है, नहीं मुझको बताते हैं।
दूर से ही इशारों में, सिर्फ बस बात करते हैं,
कभी न करीब आते हैं, दूर रहकर सताते हैं।।
झूठ-मूठ की बस मुझसे,रोज बातें बनाते हैं।
करके वादे नित झूठे, हमें सपने दिखाते हैं।
खफा हमसे सदा रहते,देख मुँह फेर लेते हैं,
सितम ढाते सितमगर बन,सदा मुझको रुलाते हैं।।
उल्टी-सीधी बातें बस,सदा मुझको सुनाते हैं।
घाव देते सदा उर को, नहीं मलहम लगाते हैं।
ब्याह कर गेह में लाए,बना कर प्रेम से दुल्हन,
पति के जैसे पर मुझसे, नहीं रिश्ता निभाते हैं।
रचना-राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)












