गर मनुष्य ना हो तो ज्ञान नहीं होगा
जो ज्ञान देनेवाला ना हो तो ज्ञानी कौन होगा
हर युग में ही गुरु का स्थान सर्वोपरी रहा है
गुरु बिन ज्ञान जैसे दिशाहीन पथिक निशान रहा है
ज्ञान जीवन की राह दिखानेवाला पथ है
सारथी को साधने का एक अक्षुण्य रथ है
बिन ज्ञान जीवन एक अंधेरी काल कोठरी है
दिशाहीन मार्ग की संपूर्ण नैराश्य पूर्ति अधूरी है
ज्ञान के प्रकाश से सृष्टि पूर्ण उजियारी होती है
लक्ष्य साधने की व्यवस्थित तैयारी होती है
गुरु ज्ञान को साधने का एक नैसर्गिक माध्यम होता है
गुरु बिन भटकाव का निश्चित नियामक सिद्धांत होता है
गुरु ईश्वर से साक्षात्कार का परोक्ष एक सोपान है
जीवन के कष्ट निवारण का एक सापेक्ष विधान है
बिन गुरु ज्ञान की कल्पना भी अस्वीकार होती है
बिन गुरु जैसे बिन पतवार नाव होती है
यथार्थ — गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाये
बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताये
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












