
आधुनिक भारत के एक महान अभियंता (इंजीनियर), प्रखर राजनेता और दूरदर्शी राष्ट्र निर्माता थे, जिनका जन्मदिन 15 सितंबर को भारत में ‘अभियंता दिवस’ (इंजीनियऱ्स डे) के रूप में मनाया जाता है।
उनका व्यक्तित्व, दूरदर्शिता और अनुशासन:
वे सादगी, अनुशासन, और अटूट कर्मनिष्ठा की मिसाल थे। उनका यह विचार “काम ही पूजा है” (Work is Worship) उनके जीवन का मूल मंत्र था।
दीर्घायु और जीवटता:
वे 101 वर्ष से अधिक की आयु तक जीवित रहे और हमेशा सक्रिय रहे। उनका कहना था कि जब बुढ़ापा दरवाजा खटखटाता है, तो वे जवाब देते हैं कि “विश्वेश्वरैया घर पर नहीं हैं”।
सम्मान: राष्ट्र निर्माण में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘नाइट’ (KCIE) की उपाधि दी तथा वर्ष 1955 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
राष्ट्र हित में कृतित्व (कार्य और योगदान)
इंजीनियरिंग और बांध निर्माण: उन्होंने मैसूर में कावेरी नदी पर प्रसिद्ध कृष्णराज सागर (KRS) बांध का निर्माण कराया, जो उस समय देश का सबसे बड़ा जलाशय था। इससे बंजर भूमि उपजाऊ बनी और लाखों एकड़ जमीन की सिंचाई हुई।
बाढ़ सुरक्षा प्रणाली:
उन्होंने हैदराबाद शहर को बाढ़ से बचाने के लिए बेहतरीन सुरक्षा प्रणाली का सफल डिजाइन तैयार किया। पानी के नियमन के लिए स्वचालित स्लुइस गेट (Automatic Sluice Gates) का आविष्कार किया।
औद्योगिक एवं प्रशासनिक विकास:
मैसूर के दीवान (1912-1918) के रूप में उन्होंने मैसूर सोप फैक्ट्री, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और बेंगलुरु में इंजीनियरिंग संस्थानों की नींव रखी। देश में औद्योगिकीकरण को गति दी।
शिक्षा में योगदान:
उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय, बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और कई तकनीकी संस्थानों की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई।
भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने न केवल जमीन पर बेहतरीन ढांचागत निर्माण किए, बल्कि अपनी लेखनी और विचारों से स्वतंत्र भारत की आर्थिक योजना की मजबूत नींव भी रखी। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकें और उनके नेतृत्व में पूरे हुए विशेष प्रोजेक्ट्स का विवरण नीचे दिया गया है:-
सर विश्वेश्वरैया द्वारा लिखित प्रमुख पुस्तकें:-
प्लांड इकॉनमी फॉर इंडिया
(Planned Economy for India – 1934): यह उनकी सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण पुस्तक है। इस पुस्तक में उन्होंने भारत के योजनाबद्ध आर्थिक विकास और औद्योगिकीकरण का एक खाका तैयार किया था। भारत में ‘पंचवर्षीय योजनाओं’ (Five-Year Plans) की शुरुआत की प्रेरणा इसी पुस्तक से मिली थी।
रिकंस्ट्रक्टिंग इंडिया
(Reconstructing India – 1920): इस पुस्तक में उन्होंने औपनिवेशिक काल के दौरान भारतीय समाज के पुनर्निर्माण, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर बल दिया था।
मेमोयर्स ऑफ माई वर्किंग लाइफ (Memories of My Working Life – 1951): यह सर विश्वेश्वरैया की आत्मकथा है। इसमें उन्होंने अपने पेशेवर जीवन के अनुभवों, विभिन्न प्रोजेक्ट्स की चुनौतियों और उनके समाधानों का विस्तार से वर्णन किया है।
अनइम्प्लॉयमेंट इन इंडिया:
इट्स कॉज एंड क्योर (Unemployment in India: Its Causes and Cure – 1932): इस पुस्तक में उन्होंने भारत में बेरोजगारी की समस्या का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और इसे दूर करने के लिए तकनीकी शिक्षा एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।
उनके जीवन के प्रमुख व विशेष प्रोजेक्ट्स:-
सर विश्वेश्वरैया की इंजीनियरिंग के कारनामे केवल मैसूर तक सीमित नहीं थे, बल्कि पूरे देश (और विदेशों) में फैले हुए थे।
कृष्णा राजा सागर (KRS) बांध, मैसूर,
स्वचालित स्लुइस गेट्स का पेटेंट (1903): पुणे की खड़कवासला झील,
हैदराबाद की मूसी नदी बाढ़ सुरक्षा प्रणाली (1908)।
सुक्कुर जल परियोजना (वर्तमान पाकिस्तान),
भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स: मैसूर,
विशाखापत्तनम बंदरगाह (Port) संरक्षण:,
अदन (Aden, यमन) जल आपूर्ति: वर्ष 1906।
इस प्रकार यह निर्विवाद है कि भारत रत्न सर एम विश्वेश्वरैया एक महान इंजीनियर, दार्शनिक, वैज्ञानिक और लेखक थे और उनका योगदान भारत के विकास में महत्वपूर्ण तथा अद्वितीय है।
आज उनके जन्मदिन पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’ ‘विद्यासागर’, लखनऊ













