
कृष्ण दूत बनके पधारे बृज उद्धव जी,
सोचे बिसराय देंगे प्रीति बृजवारी की।
ज्ञान को बखान करि हारे जब उद्धव तो,
मानै है अटूट प्रीति गोपिन अनारी की।।
गोपी ग्वाल बालिन के असुअन देख देख
सुधि बुद्धि खोय देख प्रीति बनवारी की।।
सोचे थे अनन्य भक्त मेरे सम कोहू नहि,
प्रेम पाठ सीखों प्रीति, देखके दुलारी की।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश












