
मुखड़ा
देवा हो देवा गणपति देवा, तेरी महिमा अपार।
रिद्धि-सिद्धि संग आना गजानन, स्वागत करे संसार।।
शंकर-पार्वती के प्यारे, तुम हो लाड़ले लाल,
तेरे दर्शन पाकर प्रभु जी, खिल उठे हर हाल।
मंगलमूर्ति विघ्न विनाशक, आकर काज सँवारो,
ज्ञान-बुद्धि के दीप जलाकर, जीवन-पथ उजियारो।
भक्त पुकारें प्रेम से तुमको, सुन लो उनकी पुकार।
रिद्धि-सिद्धि संग आना गजानन, स्वागत करे संसार।।
मोदक प्रिय हैं तुम्हें गजानन, दूर्वा भोग लगाएँ,
प्रेम-सुधा से भरे हृदय ले, मंगलगीत सुनाएँ।
तेरे चरणों में शीश नवाकर, सुख-शांति हम पाएँ,
करुणा-दृष्टि करो प्रभु ऐसी, सारे कष्ट मिटाएँ।
तेरी कृपा से दूर हो मन का, हर संशय-अंधकार।
रिद्धि-सिद्धि संग आना गजानन, स्वागत करे संसार।।
मूषक सवारी लेकर आओ, द्वार सजे दरबार,
प्रथम पूज्य हे विघ्नहर्ता, तुमसे मंगलाचार।
शुभ अवसर पर प्रथम तुम्हारा, होता है आवाहन,
तेरी कृपा से पूर्ण हो प्रभु, मन का हर अरमान।
प्रेम-सद्भाव जगत में भर दो, सुखमय हो संसार।
रिद्धि-सिद्धि संग आना गजानन, स्वागत करे संसार।।
देवा हो देवा गणपति देवा, तेरी महिमा अपार।
रिद्धि-सिद्धि संग आना गजानन, स्वागत करे संसार।।
डाॅ. सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












