
पग पग रूढ़िवाद विविध मनुजवाद
अंध-अंध तलवा के
बान्ह भगाईं जी।
नियति मिजाज के थिरक रामराज के
जगत सुराज
संबंध सजाईं जी।।
स्वस्थ समाज के सुमंगल काज के
बिखधर मन के
विषाद मिटाईं जी।
पुलक मिजाज वरि मनवाँ के खाज हरी
बम बम हर हर
नाद रमाईं जी।।
दुनिया के नक्शा के एक ही बक्सा में
लेके समेट एके
घोष जगाईं जी।
पुरुषार्थ हमार सप्त सिंधु हमार
अरु धरनी हमार एके
रोष मनाईं जी।।
भारत के प्यारा नारा पुरुखन के रचन सारा
आज समय कहे
हृदय लगाईं जी।
तनिको ना आनाकानी एकल घराना जानि
गोत गोतियन एके
घरवा बसाईं जी।।
✍️ सुरेन्द्र सिंह ‘अंशु’🙏












