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हर घर की रोशनी होती हैं बेटियां ,

हर घर की रोशनी होती हैं बेटियां ,

अंधेरों से डठ कर लड़ लेती है बेटियां,

उजाले घर के क़ायम रखतीं हैं बेटियां,

दिन में सूरज और रातों को चांद बन कर

घर में चमचमाती हुई रहती है बेटियां,

मायके की फूलवारी होती है,

और ससुराल की घनी – छांव होती हैं बेटियां,

पिता के कुल का ताज होती हैं बेटियां,

ससूराल के कुल का सम्मान होती हैं बेटियां,

कभी कभी याद बहुत आती है बेटियां,,,
हमारी हर खुशी की
दुआ बन जाती हैं बेटियां,,

सच में जिंदगी मे सकूं की ,
दहलीज है बेटियां,

माना के,
बेटों से आशियां है,,,
पर आशियां की रौनक हैं बेटियां,

कहते हैं तो समझ भी लेते बेटे मगर,
बिन कहे ही सब कुछ समझ लेती हैं बेटियां,

सच में बेटी बेटी ही नहीं होती,
एक पिता की नजर में,
कभी कभी *पिता की *मां* भी होती है बेटियां,

बड़े किस्मत वाले होते हैं जिनके घर जन्म लेती हैं बेटियां,

अशोक, कैलाश सुमन भवानी मंडी (राज.)

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