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श्री राधा अष्टमी

वृषभानु तनुजा सुभग, कीरति-माता प्यारी।
श्याम-मुखी संग प्रेम कथा, सब पर छाई सारी।।

मधुबन महका प्रेम रस, बहे रसमय गाथा।
बिना राधा मोहन अधूरे, दोनों इक साथा।।

राधा रचती प्रेम लहर, कान्हा मोहन मोहे।
रस की रानी भाव विभोर, लीला गूढ़ न खोए।।

श्याम रंग में रंगी राधा, मोहन राधा में।
बंसी बहे विरह की साजे, युगल अधूरी थामे।।

राधा नाम सुगंध सम, मन-मन में भर जाए।
जित-तित हो राधा-स्मरण, कृष्ण वहीं मुसकाए।।

प्रेम बिना है शून्यता, राधा-मोहन कहते।
निःस्वार्थ अनुराग ही, जीवन संजीवक रहते।।

माधुरी भावों की रचना, राधा ने दी प्यारी।
आनंद-भाव सरस करै, बहे भक्ति की धारा सारी।।

राधा अष्टमी के दिन, हम भजें राधा-नाम।
शरण पड़े श्री चरण में, मिटे सब दुःख-ग्राम।।

राधे-राधे जपें सदा, मन हो निर्मल धारा।
प्रेम सुमन अर्पण करें, वंदन भाव अपारा।।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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