
वाह भई वाह,
अब जिंदगी को बेहतर बनाने का मुझे तरीका मिला,
और भी निखर गया मैं,
माटी से मैला होकर के ,
अब बहुत कुछ सिखने को मुझे मिला,
नया नया था तो लोगों ने मुझे पहचानने से इंकार कर दिया,
अब बिन मांगे ही उन्हीं से जीने का मुझे सिलिका मिला,
कभी नहीं पसंद आया मैं, मेरे चाहने वालों को,
आज हारने के बाद ही उन्हीं से जीतनें का तरीका मिला,
कामयाबी तो सफलता के कदम चूमती है,
मगर सफलता की सीढ़ी चढ़ते हुए एक ना गंवार मिला,
,
मुझे कामयाबी मिली
छुपके से अंधेरों में,
जब हारने वालों से मुखालिफ हो करके जब मैं मिला,
गर्दीश में मेरे सितारों को देख कर कहीं,
यह न समझ लेना कि मैं होंश खो बैठा हुं ,
एक राज़ की बात कहुं जो मुझे मुफ्त में मिली है ,
अंधेरों में उजाला करने का हुनर भी मुझे अंधेरों से ही मिला ।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












