
राधा अष्टमी का पावन त्योहार,
भादों अष्टमी की महिमा अपार।
घरों में रहता उत्सव-सा माहौल,
बरसाने में आती खुशियों की बहार।
राधा कृष्ण की हैं प्रेयसी प्यारी,
रहती सदा हृदय में उनके न्यारी।
कृष्ण हैं तन तो आत्मा हैं उनकी,
अनुपम प्रेम की लीला रचती।
मथुरा, वृंदावन और उनका बरसाना,
कृष्ण की छवि में सदा हैं वो बसती।
लक्ष्मी माता-सा रूप सजाती,
नयनों से प्रेम की जलधारा बरसाती।
आओ करें सब मिलकर वंदन उनका,
प्रेम से बढ़कर दूजी बात न सिखाती।
प्रेम में समर्पित करके अपना जीवन,
सारे जग की अनूठी मिसाल बन जाती।
मधु गुप्ता ‘अपराजिता’
गाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश












