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शांति की राह

गजल सृजन
काफिया —आने
रफीद –लगे।
बहर=212–212–212–212=20

राम को ध्यान में हम लगाने लगे,
शांति की राह फिर से दिखाने लगे।

मोह-माया हमें जब लुभाती रही,
द्वेष के बादल सभी घिर छाने लगे।

क्रोध की आग को फिर दबाते चले,
शांति के फूल वतन महकाने लगे।

भेदभाव तज बंधन सभी खोलकर,
एकता गीत मिलकर सुनाने लगे।

देश में शांति की चाह है मानिए,
है’ सुरभि’ कामना प्यार गाने लगे।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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