
शीर्षक – सद्व्यवहार
इस जीवन में शांति और सद्व्यवहार चाहिए।।
अपने परिवार समाज में भी संस्कार चाहिए।।
बड़ों का मान करें, छोटों से प्यार करें।
हर मानव के मन में ऐसा विचार चाहिए।।
मीठी वाणी बोलें, कटुता दूर करें।
रिश्तों में स्नेह भरा संसार चाहिए।।
दुखियों के आँसू पोंछें, सेवा का भाव रखें।
हर दिल में मानवता का आधार चाहिए।।
लोभ-मोह को छोड़ सदा सच्चाई अपनाएँ। जीवन में सत्य-धर्म का सत्कार चाहिए।।
बच्चों को धन से पहले संस्कार सिखाएँ।
उनके जीवन में ज्ञान का भंडार चाहिए।।
जाति-धर्म के भेद मिटाकर साथ चलें।
समाज में प्रेम और भाईचारा चाहिए।।
क्रोध अगर आए तो धैर्य से काम लें।
हर मन में क्षमा का व्यवहार चाहिए।।
प्रवल कहे, यही जीवन की सच्ची कमाई। घर-घर सुख, शांति और संस्कार चाहिए।।
इस जीवन में शांति और सद्व्यवहार चाहिए।।
अपने परिवार समाज में भी संस्कार चाहिए।।
कुँ० प्रवल प्रताप सिंह राणा ‘प्रवल’
जम्मू











