राधे-राधे के भक्तिरस में डूबी कल्पकथा की 265वीं काव्यगोष्ठी, राधाष्टमी पर बरसा राधा-नाम का अमृत

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम हिन्दी भाषा सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा द्वारा शुभ श्री राधाष्टमी पर्व विशेष 265वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी का आयोजन राधे राधे विषय पर अत्यंत भक्तिमय, भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। ब्रज की अधिष्ठात्री श्री राधिका रानी के पावन प्राकट्य पर्व को समर्पित इस साहित्यिक अनुष्ठान में देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े सृजनकारों ने राधा-तत्त्व, प्रेम, माधुर्य, समर्पण और भक्ति की विविध भावधाराओं को काव्य के माध्यम से स्वर प्रदान किया।
संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह की सूचना के अनुसार कार्यक्रम का संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेश तिवारी ‘मक्खन’ ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। मंगलाचरण की भक्तिमय स्वर-लहरियों ने ऑनलाइन साहित्यिक मंच को ब्रज की आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया। इसके पश्चात भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, शोभा प्रसाद, रमापति मौर्य, प्रेमलता कुमारी ‘पुष्पेश’, संध्या श्रीवास्तव ‘सांझ’, रमेश चंद्रा गौतम, मणिका वर्मा, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, डॉ राजेश तिवारी मक्खन, विजय रघुनाथराव डांगे, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र आदि ने अपनी-अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीराधा के चरणों में शब्द-पुष्प अर्पित किए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” का भावपूर्ण गायन किया गया। राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के 150वें स्मरणोत्सव वर्ष के संदर्भ में हुआ यह गायन भक्ति से राष्ट्रचेतना तक की भावयात्रा की सुंदर परिणति बना।
इसके उपरांत दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति हृदयपूर्ण आभार व्यक्त किया। अंत में सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगलमय शांति-पाठ के साथ 265वीं कल्पकथा साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी को विश्राम प्रदान किया गया।











