
दिखे है चाँद में रोटी , मै पूनम रात का मारा
चलो अब रोक लो आँसू , समंदर हो रहा खारा
जहर होता अमिय सम है
कृपा यदि राम जी कर दें
मगर रूठा मेरा दिलवर
चरण रज दे शिला तारा
चलो अब रोक लो आँसू , समंदर हो रहा खारा१जहाँ पर गाय कटती हो न वृंदावन बचा रहता मनुज की भूँख तो देखो बिचारा चर गया चारा चलो अब रोक लो आँसू , समंदर हो रहा खारा२* कली को बागवाँ मसले बुराई रात दिन हरषे लगी जब आग दुनिया में गिरा तो क्यूँ गिरा पारा चलो अब रोक लो आँसू , समंदर हो रहा खारा३
गिरायी कोख की सीता
करें मन राम की इच्छा
कहें इतिहास के पन्ने
पिता कुल दीप से हारा
चलो अब रोक लों आँसू, समन्दर हो रहा खारा ****४
गोप कुमार मिश्र











