Uncategorized
Trending

किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँबहुत अपना था जो,

किसी ख़ामोश दरिया का किनारा हो गया हूँ
बहुत अपना था जो,
उससे किनारा हो गया हूँ
ना जाने किसलिए आँखें अभी तक ढूंढती हैं कुछ,
मैं अपने ही सवालों का इशारा हो गया हूँ
वो चेहरा याद आता है तो मौसम रुक से जाता है
मैं गुजरे वक़्त का साया सा हो गया हूँ
ना शिक़वा है,ना कुछ कहने की तमन्ना है अब
जो कहना था अब वो हमारा हो गया हूँ
कभी लगता है वो अभी भी मुझमें कहीं ठहरा सा है
और कभी लगता है कि मैं बस उसका साया सा हो गया हूँ
अजब रिश्ता रहा उससे कभी मिल कर भी उसका ना हुआ हूँ
मैं आधा रह गया और कभी अधूरा सा रह गया हूँ
किस नाम पे लिख दूँ ये बेचैनी दिल की
जिसे खोया नहीं मैंने बस उसी का हो गया हूँ।
के वी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *