
सरल नहीं यूं ,अपनी बात रख पाना
विचारों के ववंडर को ,धार दे पाना ।।
कोई भाव आते आते, जुबां लड़खड़ाती है
हृदय स्पंदन से , उठे , डर से बाहर आना ।।
हकीकत जब दृश्यम रूप में ठहर जाती है
अनजानी पीढ़ा ,भय का रूप ले ,उभर आती है ।।
नहीं आसान होता हैं,अपने साए से भाग पाना
मुश्किलो की नाव में, जिंदगी तब नज़र आती है ।।
आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, भारत











