
विषय – बिगड़ गई दुनिया मोबाइल के मारे
हाथ में डिब्बा जादू का, दुनिया हुई दीवानी है,
मोबाइल की इस दुनिया की, अजब-गजब कहानी है।
सुबह आँख जो खुलती है, स्क्रीन पे नजरें जाती हैं,
बिना रील्स के अब यारों, सुबह नहीं हो पाती है।
चाय की प्याली ठंडी हो, चाहे खाना जल जाए,
मगर चैट का मैसेज दूजा, झटपट कौन भगाए।
पास में बैठे अपनों से, मुँह फेरे सब रहते हैं,
दूर बैठे किसी अजनबी से, दिल की बातें कहते हैं।
छोटे-छोटे बच्चों ने भी, बस्ता दूर भगाया है,
पढ़ाई-लिखाई छोड़ हाथ में, फोन नया उठाया है।
गेम खेल-खेल के भैया, आँखें लाल हुई जाती हैं,
बैटरी लो होते ही सबकी, जान हलक में आती है।
पापा ढूँढें चार्जर अपना, मम्मी वाई-फाई टटोले,
नेट पैक जो खत्म हो जाए, कोई मुँह ना कुछ बोले।
लाइक और कमेंट्स के लिए, सब गुब्बारे से फूल गए हैं,
अपनों वाले सारे रिश्ते, मान-मर्यादा भूल गए हैं।
छोड़ो भाई माया इसकी, अपनों को भी अपनाओ,
स्क्रीन की इस दुनिया से, बाहर जरा तुम आ जाओ।
हँस लो-बोल लो अपनों संग, जीवन बहुत सुहाना है,
यह मोबाइल तो दो दिन का, बस एक नया बहाना है।
रीना पटले शिक्षिका
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश











