
अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु के अनंत (अंतहीन) स्वरूप की आराधना और अनंत सूत्र को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वभगवान विष्णु की पूजा: इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इनकी उपासना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
अनंत सूत्र का महत्व: पूजा के दौरान 14 गांठों वाला अनन्ता भगवान को अर्पित किया जाता है। यह 14 गांठें चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं।
कष्टों से मुक्ति: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने खोए हुए राज्य और सम्मान को वापस पाने के लिए यह व्रत किया था। इस व्रत और सूत्र को धारण करने से संकटों से रक्षा होती है और पापों का नाश होता है।
गणेश विसर्जन: यह दस दिवसीय गणेश उत्सव का अंतिम दिन भी होता है। इस दिन भक्त बाप्पा को विदाई देते हैं और जल में गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
सूत्र धारण करने का तरीका: पूजा के बाद पुरुष इस रक्षा सूत्र को अपनी दाहिनी भुजा पर और महिलाएं बाईं भुजा पर बांधती हैं।
व्रत और दान: इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ अनंताय नमः’ का जाप किया जाता है। पूजा के पश्चात जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना बहुत शुभ माना गया है।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ ‘विद्यासागर’, लखनऊ











