
चलते ही जाना है,
चलते ही जाना है,
जिस ओर भी ले जाएं,
हमको हमारी राहें,
बड़ी दूर हैं मंजिल
जीवन की इस डगर में,
तुम्हें सम्भाल लेंगी,
श्री कृष्ण की बाहें।
टूटी है मेरी नांव,
और दूर है किनारा,
तुफान से डर लगता है
भंवर में न फंस जाएं,
तेरे नाम का सहारा,
जीवन हमेशा बचाऐ,
आंखे तरस रही है,
दर्शन को तुम्हारे ।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)













