
प्दत्त शब्द – #लहरों की पायल और किनारों का इंतजार
विधा- लावणी छंद
*16,14पर यति,अंतिम वर्ण एक गुरु)
लहरों की पायल बोल उठी,सागर ने मृदु गीत सुना।
कर रहे किनारे इंतजार,उमंग ने मन प्रीत चुना।
नील गगन के नीचे देखो,लहरें विह्वल हो उछली।
सजा किनारा बाँह पसारे,लहरे आ- आकर मचली।
चाँदनी ने श्वेतता घोली, सागर धुंध आँचल दमका।
तारों ने टिम-टिम कर देखा, जल सपना जैसे चमका।
शीतल पवन संदेश लाई, दूर क्षितिज से मन बोला।
लहरों ने तट को छू-छूकर, प्रेम मधुरिम राज खोला।
सीपों में मोती मुस्काए, रेत ने स्वप्न सजा लिए।
जलतरंग के मधुर सुरों ने, मन के तार हर्षित किए।
आना-जाना जीवन जैसा, लहरों ने यह बात कही।
मिलने की हर आस अमर है, दूरी भले कितनी रही।
सूरज की किरणें जब उतरीं, जल पर स्वर्णिम रंग भरा।
नई सुबह ने भरा भरोसा , मन में नई उमंग हरा।
लहरों की पायल बजती है, कूल ने बाँहें खोल दी।
सागर ने फिर गीत सुनाया, हवाओं ने धुन घोल दी।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













